सोपोर में UAPA के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी: क्या जम्मू-कश्मीर में फिर तेज हो रही है आतंक और अलगाववाद के खिलाफ कार्रवाई?
सोपोर में UAPA के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी: क्या जम्मू-कश्मीर में फिर तेज हो रही है आतंक और अलगाववाद के खिलाफ कार्रवाई?
सोपोर में UAPA के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी: सोपोर में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने UAPA केस में 15 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की। बैनशुदा जमात-ए-इस्लामी से जुड़े इस मामले ने घाटी में सुरक्षा एजेंसियों की नई रणनीति और आतंक नेटवर्क पर कार्रवाई को फिर चर्चा में ला दिया है।
अमित कौल | डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 17 मई, 2026 – उत्तरी कश्मीर के सोपोर में शनिवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा चलाया गया व्यापक तलाशी अभियान एक बार फिर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था, अलगाववादी नेटवर्क और आतंकवाद विरोधी रणनीति को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है। पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज एक मामले में 15 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। यह मामला बैनशुदा संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़ा बताया जा रहा है।
सोपोर लंबे समय से कश्मीर घाटी में संवेदनशील इलाकों में गिना जाता रहा है। यहां समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियों को अलगाववादी गतिविधियों, आतंक नेटवर्क और कट्टरपंथी संगठनों की मौजूदगी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में एक साथ तलाशी अभियान चलाना यह संकेत देता है कि सुरक्षा एजेंसियां घाटी में किसी भी प्रकार के संगठित नेटवर्क को दोबारा सक्रिय होने से रोकने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही हैं।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई सोपोर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 42/2025 के तहत की गई। मामला UAPA की धारा 10 और 13 से संबंधित है, जो किसी गैर-कानूनी संगठन की सदस्यता लेने, उसका समर्थन करने या उसकी गतिविधियों को बढ़ावा देने से जुड़ी धाराएं हैं। अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान अदालत से विधिवत सर्च वारंट लेने के बाद शुरू किया गया और पूरी प्रक्रिया एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट तथा स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की गई।
छापेमारी जिन इलाकों में की गई, उनमें जामिया कदीम, नसीम बाग, क्रांकशिवन, तारज़ू, अमरगढ़, वारपोरा, बोमाई और बोइटिंगू जैसे इलाके शामिल हैं। इन इलाकों को सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से निगरानी सूची में रखे हुए थीं। पुलिस ने तलाशी के दौरान कई “आपत्तिजनक सामग्रियां” बरामद करने का दावा किया है, जिनमें कथित तौर पर बैनशुदा संगठन से जुड़ा साहित्य भी शामिल है। फिलहाल जब्त सामग्री की जांच की जा रही है।
आखिर क्यों अहम है यह कार्रवाई?
यह कार्रवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की बदलती रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने घाटी में आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने की बात कही थी। इसके बाद कई अलगाववादी नेताओं की गिरफ्तारी, फंडिंग नेटवर्क पर कार्रवाई और प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ सख्त कदम देखने को मिले।
जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार ने पहली बार 28 फरवरी 2019 को पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया था। सरकार का आरोप था कि संगठन घाटी में अलगाववाद और उग्रवाद को वैचारिक समर्थन दे रहा है। बाद में इस प्रतिबंध को आगे भी बढ़ाया गया। हालांकि संगठन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसके कुछ तत्व युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और आतंकी संगठनों को अप्रत्यक्ष समर्थन देने में शामिल रहे हैं।
सोपोर में UAPA के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी: सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं के पैटर्न में बदलाव देखा गया है। पारंपरिक आतंकवाद के साथ-साथ अब “हाइब्रिड आतंकवाद” और स्थानीय स्तर पर छोटे मॉड्यूल्स की सक्रियता सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रही है। ऐसे नेटवर्क अक्सर सीधे हथियारबंद गतिविधियों में शामिल नहीं होते, लेकिन वैचारिक, वित्तीय या लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करते हैं।
यही कारण है कि अब सुरक्षा एजेंसियां केवल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन नेटवर्क्स को भी निशाना बना रही हैं, जो कथित तौर पर जमीन तैयार करने का काम करते हैं। सोपोर में हुई यह कार्रवाई उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस तरह की कार्रवाईयों का राजनीतिक असर भी पड़ता है। घाटी में कुछ राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अक्सर यह सवाल उठाते रहे हैं कि UAPA जैसे कठोर कानूनों का इस्तेमाल कहीं व्यापक स्तर पर नागरिक स्वतंत्रताओं को प्रभावित तो नहीं कर रहा। दूसरी ओर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में कठोर कानून जरूरी हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले अलगाववादी प्रभाव अधिक रहा है। केंद्र सरकार घाटी में चुनावी प्रक्रिया, पर्यटन और निवेश को स्थिर रखना चाहती है, इसलिए किसी भी प्रकार की आतंकी या कट्टरपंथी गतिविधि पर शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई करने की नीति अपनाई जा रही है।
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सोपोर में UAPA के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी: आगे क्या?
फिलहाल पुलिस जब्त की गई सामग्रियों की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या पूछताछ संभव मानी जा रही है। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क या फंडिंग चैनल का खुलासा होता है, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
सोपोर में हुई यह छापेमारी केवल एक स्थानीय पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में बदलते सुरक्षा परिदृश्य का संकेत है। यह साफ दिखाता है कि घाटी में सुरक्षा एजेंसियां अब किसी भी संदिग्ध नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही हैं। आने वाले समय में इस तरह के ऑपरेशन घाटी की सुरक्षा और राजनीति दोनों पर गहरा असर डाल सकते हैं।
लेखक के बारे में:
अमित कौल
अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।
