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हमास और लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर नेताओं की पाकिस्तान में हाई-प्रोफाइल मीटिंग: सुरक्षा एजेंसियों में बढ़ी चिंता

हमास और लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर नेताओं की पाकिस्तान में हाई-प्रोफाइल मीटिंग: सुरक्षा एजेंसियों में बढ़ी चिंता

हमास और लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर नेताओं की पाकिस्तान में हाई-प्रोफाइल मीटिंग:  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमास और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सीनियर नेताओं ने पाकिस्तान में एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग की। यह मुलाकात दक्षिण एशिया में बढ़ते आतंकवादी गठजोड़ और सीमा पार सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 7 जनवरी 2026 – मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में पाकिस्तान में हमास और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सीनियर नेताओं के बीच एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग हुई है, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ दोनों आतंकवादी संगठनों के बीच बढ़ते ऑपरेशनल और वैचारिक गठजोड़ के रूप में देख रहे हैं।

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यह मीटिंग गुजरांवाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसे पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) ने आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में हमास के सीनियर कमांडर नाजी ज़हीर और LeT के कमांडर राशिद अली संधू को मंच साझा करते देखा गया। PMML को लंबे समय से लश्कर का पॉलिटिकल फ्रंट माना जाता रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो फुटेज में दोनों नेताओं को एक साथ खड़े देखा जा सकता है, जिसमें ज़हीर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल थे। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की सार्वजनिक मुलाकातें आतंकवादी नेटवर्क के बीच बढ़ते संपर्क और सहयोग का संकेत देती हैं।

लंबे समय से चल रही गतिविधियाँ

यह मीटिंग कोई नई घटना नहीं है। नाजी ज़हीर पिछले कई वर्षों में कई बार पाकिस्तान जा चुके हैं और विभिन्न इस्लामी तथा आतंकवादी नेटवर्कों से जुड़े रहे हैं। फरवरी 2025 में, उन्होंने हमास के अन्य सदस्यों के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का दौरा किया और वहाँ लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों के साथ भारत विरोधी रैली में भाषण दिया।

उनकी पाकिस्तान में गतिविधियाँ कम से कम 2023 से जारी हैं। उस समय वह कराची और इस्लामाबाद में ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हुए थे, जिनमें मीडिया की उपस्थिति और इस्लामी संगठनों द्वारा स्वागत शामिल था। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की बार-बार की यात्राएँ और सार्वजनिक गतिविधियाँ हमास और अन्य आतंकवादी नेटवर्क के बीच वैचारिक और ऑपरेशनल तालमेल की दिशा में जानबूझकर किए गए प्रयास हैं।

हमास और लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर नेताओं की पाकिस्तान में हाई-प्रोफाइल मीटिंग:  क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और सीमा पार आतंकवाद की चिंताएँ बढ़ रही हैं। भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ लंबे समय से पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों और वैश्विक जिहादी नेटवर्कों के बीच संबंधों पर नजर रख रही हैं। हाल की घटनाएँ नई दिल्ली और अन्य स्थानों पर सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकती हैं।

पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से अपनी धरती पर आतंकवादी समूहों को पनाह देने या समर्थन देने से इनकार किया है। हालांकि, इस तरह की सार्वजनिक मीटिंगें कुछ और ही संकेत देती हैं। अगर हमास और पाकिस्तान स्थित समूहों के बीच यह संबंध साझा योजनाओं, संसाधनों या समन्वित कार्रवाई में बदलता है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को जटिल बना सकता है।

निष्कर्ष

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मीटिंग से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान में हमास और लश्कर जैसे आतंकवादी नेटवर्क सक्रिय और संगठित हैं। भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर नजर रखना और इनसे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के लिए तैयारी करना क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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इस घटना ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद विरोधी प्रयासों को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में हमास और LeT जैसे नेटवर्कों के बीच सहयोग और साझा गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

लेखक के बारे में

 

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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