सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की, वर्षों से बिना ट्रायल जेल में बंद
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की, वर्षों से बिना ट्रायल जेल में बंद
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों छात्र नेता पिछले कई वर्षों से बिना ट्रायल जेल में हैं। जानिए पूरा मामला।
अमित कौल | डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 5 जनवरी 2026 – भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ही पूर्व छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। दोनों पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) समेत गंभीर आरोप लगे हैं और वे पिछले कई वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है।
क्या है मामला?
उमर खालिद और शरजील इमाम पर आरोप है कि उन्होंने 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए और हिंसा की साजिश रची। दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने दोनों को गिरफ्तार कर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस का दावा है कि इन गतिविधियों से सार्वजनिक शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की: सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूएपीए जैसे विशेष कानूनों में जमानत के मापदंड सामान्य मामलों से अलग होते हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि आरोपी लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन इस आधार पर स्वतः जमानत नहीं दी जा सकती।
बिना ट्रायल लंबी हिरासत पर बहस
इस मामले ने एक बार फिर “लंबे समय तक बिना ट्रायल जेल में रखने” के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों तक मुकदमा शुरू न होना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
वहीं, सरकारी पक्ष का तर्क है कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और कानून के तहत जांच और सुनवाई में समय लग सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की: देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
- कुछ विपक्षी दलों ने फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए चिंता जताई है।
- वहीं, सत्तापक्ष समर्थकों का कहना है कि अदालत ने कानून के दायरे में रहकर निर्णय दिया है और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा?
कानूनी जानकारों के अनुसार, अब दोनों आरोपियों के पास निचली अदालत में ट्रायल को तेज कराने या परिस्थितियों में बदलाव होने पर फिर से जमानत याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा है।
इसके साथ ही, यह मामला आने वाले समय में यूएपीए कानून, नागरिक अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया पर राष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकता है।
https://vartaprabhat.com/himachal-nalagarh-dhamaka-bki-psa-jimmewari/
निष्कर्ष
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने से यह स्पष्ट हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में बेहद सतर्क रुख अपनाता है। हालांकि, लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में देरी जैसे मुद्दे अब भी भारतीय न्याय प्रणाली के सामने एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
लेखक के बारे में:
अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

Pingback: अंबाला एयर फ़ोर्स स्टेशन की जासूसी के आरोप में ठेकेदार गिरफ़्तार, पाकिस्तान को भेजी जा रही थी संव