नवीनतमप्रदर्शितप्रमुख समाचारराष्ट्रीयसमाचार

आईएनएस विशाल: भारत का तीसरा विमानवाहक पोत जल्द होगा तैयार

आईएनएस विशाल: भारत का तीसरा विमानवाहक पोत जल्द होगा तैयार — बनेगा समुद्री शक्ति का नया प्रतीक

आईएनएस विशाल जल्द भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा है। फ्रांस और ब्रिटेन तकनीकी सहयोग की दौड़ में। यह पोत भारत को समुद्री शक्ति की नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।

आईएनएस विशाल— भारत की समुद्री सुरक्षा में अगला बड़ा कदम

भारत की नौसैनिक क्षमता को और सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम जल्द ही पूरा होने वाला है। भारतीय नौसेना के बेड़े में तीसरा विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) INS विशाल शामिल होने जा रहा है। यह पोत न केवल तकनीकी दृष्टि से बेहद उन्नत होगा, बल्कि भारत के समुद्री रणनीतिक हितों को भी एक नए आयाम तक ले जाएगा। इसे आधुनिक युद्धक्षमता से लैस एक “गेम चेंजर” माना जा रहा है।

भारत इस समय दो विमानवाहक पोतों — आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत — के साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी का संकेत दे रहा है। लेकिन बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण और चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत को देखते हुए तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

https://www.jagran.com/world/america-donald-trump-third-world-ban-after-white-house-attack-us-immigration-policy-40054267.html

फ्रांस और ब्रिटेन तकनीकी साझेदारी की दौड़ में

आईएनएस विशाल के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी अहम भूमिका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना में फ्रांस और ब्रिटेन दोनों ही तकनीकी साझेदारी के लिए आगे आए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के लिए कई तरीकों से महत्वपूर्ण होगी, जैसे:

  1. उन्नत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम (EMALS) उपलब्ध कराना
  2. लंबी दूरी तक निरंतर ऑपरेशन की क्षमता
  3. आधुनिक स्टेल्थ फीचर्स और बेहतर रडार तकनीक
  4. AI और नई पीढ़ी के युद्धक विमानों के संचालन की क्षमता
  5. इन तकनीकों के साथ INS विशाल भविष्य के नौसैनिक युद्ध के लिए पूरी तरह सक्षम होगा।
  6. भारत की समुद्री रणनीति में INS विशाल का महत्व

भारत का भौगोलिक स्थान उसे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक निर्णायक भूमिका देता है। यह क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और सामरिक सुरक्षा का केंद्र है। ऐसे में किसी भी राष्ट्र की समुद्री शक्ति उसके वैश्विक प्रभाव का प्रतीक होती है।

आईएनएस विशाल से मिलने वाले प्रमुख लाभ:

📍 इंडो-पैसिफिक में भारत की मजबूत सैनिक मौजूदगी
📍 युद्धक विमानों की अधिक संख्या और बड़ी ऑपरेशन क्षमता
📍 त्वरित युद्ध प्रतिक्रिया क्षमता
📍 समुद्र से भूमि-आधारित सैन्य अभियानों में सहूलियत
📍 चीन की नौसैनिक गतिविधियों को संतुलित करने में रणनीतिक सहायता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोत आधुनिक तकनीक, क्षमता और आक्रामक-रक्षात्मक दोनों ही भूमिकाओं में भारत की सैन्य शक्ति को बेहद मजबूत करेगा।

कब शामिल होगा भारतीय नौसेना में?

अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, INS विशाल के डिजाइन और तकनीकी मूल्यांकन के चरण पूरे हो चुके हैं और निर्माण प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इसे कुछ वर्षों में परीक्षण चरण में लाया जाएगा और फिर औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपा जाएगा।

https://vartaprabhat.com/ins-vikrant-pm-modi-diwali-with-navy-pakistan-fear/

सरकार और नौसेना का मानना है कि जैसे-जैसे समुद्री खतरों की प्रकृति बदल रही है, भारत को उच्च-स्तरीय आधुनिक नौसैनिक क्षमताओं की आवश्यकता है, ताकि वैश्विक स्तर पर अपनी सुरक्षा और रणनीतिक भूमिका को बनाए रखा जा सके।

निष्कर्ष

INS विशाल का शामिल होना भारत के लिए सिर्फ एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री मंच पर एक मजबूत नेतृत्व का संकेत होगा। यह पोत भारतीय नौसेना को रणनीतिक, तकनीकी और सामरिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली बनाएगा और भविष्य के समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में भारत की भूमिका निर्णायक होगी।

One thought on “आईएनएस विशाल: भारत का तीसरा विमानवाहक पोत जल्द होगा तैयार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *