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भारत का 8 अरब डॉलर का सबमरीन प्रोजेक्ट-75I: कैसे बदल रहा है पाकिस्तान-चीन के साथ समुद्री शक्ति संतुलन

भारत का 8 अरब डॉलर का सबमरीन प्रोजेक्ट-75I: कैसे बदल रहा है पाकिस्तान-चीन के साथ समुद्री शक्ति संतुलन

भारत का 8 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट-75I क्यों है रणनीतिक गेमचेंजर? जानिए कैसे नई पीढ़ी की पनडुब्बियां पाकिस्तान और चीन के खिलाफ भारत की समुद्री ताकत को नई धार दे रही हैं।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 14 जनवरी 2026  – 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय नौसेना की निर्णायक कार्रवाई ने कराची के बंदरगाह को पंगु बना दिया था। उस ऐतिहासिक घटना के पाँच दशक बाद, भारत एक बार फिर समुद्र के नीचे अपनी ताकत को रणनीतिक केंद्र में ला रहा है। बढ़ते क्षेत्रीय और वैश्विक तनावों के बीच भारत का 8 अरब डॉलर का सबमरीन प्रोजेक्ट-75I अब केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि पाकिस्तान और चीन के साथ शक्ति संतुलन बदलने वाला निर्णायक कदम बनता जा रहा है।

इसी संदर्भ में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा ने इस परियोजना को नई राजनीतिक और कूटनीतिक अहमियत दे दी है। रक्षा विशेषज्ञ इसे इस दशक की सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक परियोजनाओं में गिन रहे हैं।

https://www.jagran.com/news/national-isro-orbital-paradigm-pslv-mission-16-passengers-only-a-kid-survived-40106775.html

क्या है प्रोजेक्ट-75I और क्यों है यह अहम

प्रोजेक्ट-75I भारतीय नौसेना की योजना है, जिसके तहत छह अत्याधुनिक डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को शामिल किया जाएगा। ये पनडुब्बियां एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी, जिससे वे बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी के नीचे रह सकेंगी। इसमें आधुनिक सेंसर, टॉरपीडो और मिसाइल सिस्टम शामिल होंगे।

रक्षा मंत्रालय ने 2021 में इस परियोजना के लिए प्रस्ताव जारी किया था और इसे मेक इन इंडिया कार्यक्रम का प्रमुख स्तंभ बताया गया। शुरुआती अनुमान 40,000 करोड़ रुपये का था, लेकिन मौजूदा आकलन के अनुसार यह लागत लगभग 8 अरब डॉलर (72,000 करोड़ रुपये) तक पहुँच सकती है।

भारत का 8 अरब डॉलर का सबमरीन प्रोजेक्ट-75I: जर्मन टाइप-214NG क्यों बना नौसेना की पसंद

रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने जर्मनी की टाइप-214 नेक्स्ट जेनरेशन पनडुब्बी को प्राथमिकता दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका फ्यूल-सेल आधारित AIP सिस्टम, उच्च स्तर की ध्वनिक स्टेल्थ क्षमता और कम लाइफ-साइकिल जोखिम है।

AIP तकनीक पनडुब्बी को बार-बार सतह पर आए बिना लंबे समय तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है, जिससे दुश्मन की निगरानी से बचना आसान हो जाता है। नौसैनिक युद्ध में यही चुप्पी और सहनशक्ति सबसे बड़ा हथियार मानी जाती है।

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा

इस डील के तहत सभी छह पनडुब्बियां मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में बनाई जाएंगी। जर्मनी की TKMS डिज़ाइन और तकनीकी सहयोग देगी। शुरुआती चरण में स्वदेशी सामग्री लगभग 45 प्रतिशत होगी, जो अंतिम पनडुब्बी तक बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है।

यह परियोजना भारत को केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि उन्नत सबमरीन डिज़ाइन और निर्माण क्षमता भी देगी, जो भविष्य के पूर्णतः स्वदेशी प्रोजेक्ट-76 की नींव बनेगी।

भारत का 8 अरब डॉलर का सबमरीन प्रोजेक्ट-75I: पाकिस्तान और कराची की रणनीतिक अहमियत

1971 की तरह आज भी कराची पाकिस्तान की सबसे बड़ी समुद्री कमजोरी बना हुआ है। मई 2025 में बढ़े तनाव के दौरान भारत की नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना गोली चलाए कराची को खतरे में डालने की भारत की क्षमता ही सबसे बड़ा निवारक तत्व है।

नई AIP-सज्जित पनडुब्बियां इस दबाव को और मजबूत करेंगी।

चीन की बढ़ती मौजूदगी और भारत की प्रतिक्रिया

हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सबमरीन गतिविधियां भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय हैं। चीन न केवल अपनी परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान को भी आधुनिक AIP-युक्त पनडुब्बियां दे रहा है।

प्रोजेक्ट-75I का उद्देश्य इन्हीं चुनौतियों का मुकाबला करना है—चोक पॉइंट्स की निगरानी, दुश्मन पनडुब्बियों की ट्रैकिंग और समुद्री क्षेत्र में प्रभुत्व बनाए रखना।

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निष्कर्ष

प्रोजेक्ट-75I भारत की नौसैनिक रणनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह 1971 के सबक, पाकिस्तान की समुद्री निर्भरता और चीन की बढ़ती चुनौती—तीनों का जवाब है। जैसे-जैसे यह परियोजना आगे बढ़ेगी, भारत न केवल समुद्र के ऊपर बल्कि लहरों के नीचे भी निर्णायक शक्ति के रूप में उभरेगा।

 

 

लेखक के बारे में

 

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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