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भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक घोषणा, वैश्विक व्यापार में भारत को बड़ी बढ़त

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक घोषणा, वैश्विक व्यापार में भारत को बड़ी बढ़त

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक घोषणा: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर ऐतिहासिक प्रगति। जानिए इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 26 जनवरी 2026  – भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच वर्षों से अटकी मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। दोनों पक्षों के बीच इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसे भारत के लिए वैश्विक व्यापार में बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े एकल बाजारों में से एक यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे भारत के लिए “गेम चेंजर डील” बता रहे हैं, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों तक अधिक आसान और सस्ता पहुंच मार्ग मिल सकता है।

https://www.jagran.com/news/national-indiaeu-fta-details-list-of-goods-and-services-will-become-cheaper-40121550.html

FTA से भारत को क्या होगा फायदा?

भारत-EU FTA के तहत कई प्रमुख सेक्टरों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं:

  1. टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग
  2. फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग)
  3. आईटी और सर्विस सेक्टर

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक घोषणा: ऑटोमोबाइल पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान

टैरिफ (आयात शुल्क) में कटौती होने से भारतीय उत्पाद यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे निर्यात में बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती आने की संभावना जताई जा रही है।

रोजगार और निवेश पर प्रभाव

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस समझौते से भारत में विदेशी निवेश (FDI) को भी बढ़ावा मिलेगा। यूरोपीय कंपनियाँ मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा सकती हैं। इससे देश में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, खासकर युवा कार्यबल को फायदा मिलने की संभावना है।

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक घोषणा: क्यों खास है यह समझौता?

भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत लगभग दो दशक से चल रही थी, लेकिन कई मुद्दों—जैसे बौद्धिक संपदा अधिकार, डेटा सुरक्षा, कृषि उत्पाद और बाजार पहुंच—को लेकर मतभेद बने हुए थे। हालिया दौर की बातचीत में इन अड़चनों को कम करने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। यही वजह है कि इसे अब ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका

यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक कूटनीति के नजरिए से भी अहम है। यूरोप और एशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने से भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) में भूमिका और मजबूत हो सकती है। इससे चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक कोशिशों में भी भारत एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर सकता है।

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भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक घोषणा: आगे क्या होगा?

समझौते की औपचारिक घोषणा और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे दोनों पक्षों की संसदों/संस्थाओं से मंजूरी की आवश्यकता होगी। यदि सब कुछ तय समय पर होता है, तो यह समझौता आने वाले वर्षों में भारत-EU व्यापार संबंधों की दिशा बदल सकता है।

निष्कर्ष

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता केवल एक व्यापारिक डील नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत बनने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे निर्यात, निवेश, रोजगार और कूटनीतिक प्रभाव—चारों मोर्चों पर भारत को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

 

 

 

 

लेखक के बारे में

 

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

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