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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” बताया

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” बताया

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” बताया: भारत ने 27 जनवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश बताया। जानिए क्या कहा गया, क्यों यह बयान महत्वपूर्ण है और वैश्विक राजनीति पर इसका असर।

27 जनवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र (UN) सुरक्षा परिषद में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान दिया गया, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” करार दिया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया UNSC के खुले बहस सत्र में आई, जहाँ पाकिस्तान के प्रतिनिधि के तथ्यों और दावों पर भारत ने प्रभावशाली ढंग से अपना पक्ष रखते हुए आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर बल दिया।

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” बताया: क्या कहा भारत ने?

परवथनेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को एक औपचारिक “राज्य नीति” की तरह इस्तेमाल किए जाने को सहन करना “सामान्य” नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को “नया सामान्य” नहीं बनाया जा सकता जैसा कि पाकिस्तान चाहता है।

भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद को कभी भी मानवीय या कूटनीतिक हितों के अनुरूप नहीं समझा जा सकता।

भारतीय प्रतिनिधि ने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तान के दावों में तथ्यों का विकृत प्रस्तुतिकरण किया जा रहा है और यह आतंकवादियों के ढांचे को बनाए रखने की कोशिश की तरह दिखता है। यह बयान दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान हुई तनावपूर्ण घटनाओं और आतंकवादी हमलों के संदर्भ में आया, जिनमें 2025 के पहलगाम हमला का जिक्र भी किया गया, जिसमें 26 लोगों की हत्या हुई थी।

भारत ने क्या सबूत पेश किए?

भारतीय विदेश मिशन ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से यह भी कहा कि पाकिस्तान पर आरोप लगाकर आतंकवादियों को समर्थन देना राज्य द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का प्रमाण है। भारत ने इसे स्वीकार्य नहीं माना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की।

हरीश ने यह बयान देते हुए कहा, “यह पवित्र कक्ष आतंकवाद को वैधता देने वाला मंच नहीं बन सकता।” उन्होंने यह भी जताया कि हिंदुस्तान हमेशा अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

पाकिस्तान का रुख और प्रतिक्रिया

पाकिस्तान प्रतिनिधि ने ऑपरेशन सिंदूर, जम्मू-कश्मीर मुद्दे और सिंधु जल संधि के विषय पर बात करते हुए काफी तर्क दिए, लेकिन भारत ने उनके तमाम दावों को “झूठा और स्वार्थपरक” बताया। भारत का कहना था कि पाकिस्तान का एकमात्र एजेंडा भारत को नुकसान पहुँचाना है।

पाकिस्तान की ओर से बयान में संकेत मिला कि वह भारत के खिलाफ अलग-थलग माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने इसे भी सिरे से खारिज करते हुए आतंकवाद और हिंसा को इसकी मूल नीति मानने से मना किया।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” बताया: वैश्विक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे मंच पर इस तरह का बयान देना वैश्विक राजनीति में बहुत बड़ा कदम माना जाता है। भारत की यह प्रस्तुति शांति और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक दृष्टिकोण को मजबूती देती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देती है कि सीमा पार आतंकवाद किसी भी देश की सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह कूटनीतिक रणनीति वैश्विक मंच पर उसकी साख को मजबूत करेगी और देशों को आतंक के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

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निष्कर्ष

भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बताना सिर्फ कूटनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संयोजन है। यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से आगे बढ़ा रहा है और वैश्विक समुदाय को इस समस्या के प्रति सजग रहने का आह्वान करता है।

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