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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: सीएम उमर अब्दुल्ला के बयान पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया, माफी की मांग तेज

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: सीएम उमर अब्दुल्ला के बयान पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया, माफी की मांग तेज

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा:  म्मू-कश्मीर विधानसभा में सीएम उमर अब्दुल्ला के बयान पर विपक्ष का हंगामा, राजनीतिक परिदृश्य गरमा गया; जानें क्या कहा और क्यों बढ़ी विवाद की लकीर।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 11 फरवरी, 2026 – जम्मू और कश्मीर में पॉलिटिक्स एक बार फिर चर्चा और विवाद में सबसे आगे है। विपक्षी नेताओं ने जम्मू और कश्मीर लेजिस्लेटिव असेंबली में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की हालिया टिप्पणी पर तीखे सवाल उठाए हैं। इस बयान को लेकर विधानसभा में कठोर हंगामा, नारेबाज़ी और माफी की मांग ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया बयान से न केवल संवैधानिक मर्यादा को ठेस पहुँची है बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के विविध सामाजिक-राजनीतिक संतुलन के लिए भी चुनौती बन गया है। विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री के शब्द “अतिरिक्त विवादास्पद” थे और इससे सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।

https://www.jagran.com/news/national-kiren-rijiju-accuses-congress-mps-of-hurling-abuses-at-lok-sabha-speaker-om-birla-says-he-is-hurt-40138315.html

🔎 क्या कहा उमर अब्दुल्ला ने?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में दिए गए अपने बयान में कुछ ऐसी बात कही, जिसे विपक्षी विधायकों ने राजनीतिक रूप से भड़काऊ और अनुचित बताया। हालांकि उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान का कोई आपत्तिजनक इरादा होने से इनकार किया है, उन्होंने कहा कि उनका बयान वस्तुनिष्ठ विमर्श के तहत था और उसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

यद्यपि बयान का पूरा संदर्भ सार्वजनिक नहीं किया गया है, विपक्ष का तर्क है कि इससे संवेदनशील मतभेद उभर सकते हैं और जम्मू-कश्मीर की सामाजिक एकता और राजनीतिक स्थिरता को खतरा हो सकता है।

🙋‍♂️ विपक्ष की माफी की मांग: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा

विधानसभा में कांग्रेसी और अन्य विपक्षी दलों के नेता सीएम उमर अब्दुल्ला से पारदर्शी माफी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री ने अपना बयान वापस नहीं लिया तो विधानसभा विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर पूर्ण बहस की जानी चाहिए।

विपक्ष के दबाव ने विधानसभा के भीतर अनिश्चित स्थिति उत्पन्न कर दी है। विपक्ष के सदस्यों ने कई बार स्पीकर से अनुरोध किया कि वे मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण और माफी सुनिश्चित करें ताकि सदन में समानता, सौहार्द और संवैधानिक मर्यादा बनी रहे।

🧑‍💼 सीएम की सफाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यालय ने एक औपचारिक बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के विकास और एकता को प्राथमिकता दी है और उनके शब्दों को “राजनीतिक रूप से तोड़ा-मरोड़ा” जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय को अलग-थलग करने या विभाजन करने की मंशा कभी नहीं रही।

सीएम के समर्थक विधायकों ने कहा कि विपक्ष मुद्दे को गलत दिशा में ले जा रहा है और इसे चुनावी राजनीति के रूप में भुनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि विधानसभा में किसी भी स्तर का विभाजनकारी बयान संविधान के मूल्यों के खिलाफ है।

🧨 समाज और राजनीतिक समीकरणों पर असर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा

राज्य में यह मामला जल्दी ही सुर्खियों में आ गया और राजनीतिक विश्लेषक इसे विधानसभा के स्तर पर राजनैतिक टकराव के रूप में देख रहे हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बयान का सामाजिक गतिशीलता पर सीधा असर पड़ता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि विधानसभा में यह मुद्दा और अधिक गरमाया तो आगामी दिनों में इससे राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक गठजोड़, समर्थन और विपक्षी एजेंडे प्रभावित हो सकते हैं।

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📅 क्या आगे होगा?

इस विवाद के बीच यह सवाल उठता है कि क्या सरकार और विपक्ष सीधे संवाद और संयुक्त बैठक के माध्यम से इस मसले का समाधान निकाल पाएंगे? या फिर यह राजनीतिक विवाद विधानसभा की कार्यवाही को और प्रभावित करेगा?
आने वाले दिनों में विधानसभा के विशेष सत्र, वाणिज्यिक बहसें और राजनीतिक बयानबाज़ियाँ इसी विवाद के इर्द-गिर्द घूम सकती हैं।

 

 

 लेखक के बारे में

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

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