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मोदी के कॉल न करने से टूटी भारत-अमेरिका डील? अमेरिकी वाणिज्य सचिव का सनसनीखेज़ दावा

मोदी के कॉल न करने से टूटी भारत-अमेरिका डील? अमेरिकी वाणिज्य सचिव का सनसनीखेज़ दावा

मोदी के कॉल न करने से टूटी भारत-अमेरिका डील: अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया कि पीएम मोदी के राष्ट्रपति ट्रंप को फोन न करने से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता फेल हो गया। जानिए पूरी कहानी।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 9 जनवरी 2026 – भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। 9 जनवरी 2026 को लोकप्रिय “ऑल-इन पॉडकास्ट” में दिए गए एक इंटरव्यू में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता इसलिए टूट गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आख़िरी “क्लोज़िंग कॉल” नहीं किया।

लटनिक के इस बयान ने नई दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके अनुसार, समझौते का पूरा ढांचा तैयार था, लेकिन अंतिम मुहर लगाने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत ज़रूरी थी।

“सीढ़ी रणनीति” और ट्रंप का डील-मेकिंग स्टाइल

हॉवर्ड लटनिक ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति को “सीढ़ी वाली रणनीति” बताया। इस नीति के तहत जिन देशों ने जल्दी और निर्णायक तरीके से समझौते पूरे किए, उन्हें सबसे अनुकूल टैरिफ दरें मिलीं।

लटनिक ने कहा, “मैं कॉन्ट्रैक्ट्स पर बातचीत करता, पूरी डील तैयार करता। लेकिन सच यह है कि यह राष्ट्रपति ट्रंप की डील होती है। वह खुद इसे फाइनल करते हैं। हमें सिर्फ इतना चाहिए था कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति को कॉल करें।”

उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष इस कॉल को लेकर असहज था और अंततः यह कॉल नहीं हो पाई। इसके बाद अमेरिका ने वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों के साथ तेजी से समझौते कर लिए, जबकि भारत पीछे छूट गया।

मोदी के कॉल न करने से टूटी भारत-अमेरिका डील: व्हाइट हाउस की नज़र में ‘मिस्ड कॉल’ का मतलब

लटनिक के बयान से यह संकेत मिलता है कि व्हाइट हाउस ने इस कॉल को सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की कमिटमेंट और तत्परता की कसौटी के रूप में देखा। ट्रंप को एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जो व्यक्तिगत बातचीत और सीधे संवाद को अत्यधिक महत्व देते हैं।

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लटनिक ने साफ कहा कि एक साधारण फोन कॉल अरबों डॉलर के व्यापार समझौते में बची आखिरी बाधाओं को दूर कर सकता था।

अधूरी रह गईं बड़ी व्यापारिक उम्मीदें

यह व्यापार समझौता कई लंबे समय से अटके मुद्दों को सुलझाने वाला था, जिनमें शामिल थे:

  1. H-1B वीज़ा कोटा: भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अधिक अवसर
  2. कृषि बाज़ार तक पहुंच: अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों पर ड्यूटी में कटौती
  3. डिजिटल ट्रेड: डेटा लोकलाइज़ेशन और ई-कॉमर्स नियमों पर सहमति
  4. इन मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद थी, लेकिन डील फाइनल न होने से सब कुछ अधर में लटक गया।

आर्थिक और राजनयिक असर

इस कूटनीतिक गतिरोध के गंभीर आर्थिक परिणाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, अमेरिकी बाज़ार में भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाया जा रहा है, जिसमें से 25% पेनल्टी भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी। इस कानून के तहत रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों—जैसे भारत, चीन और ब्राज़ील—पर टैरिफ 500% तक बढ़ाए जा सकते हैं।

मोदी के कॉल न करने से टूटी भारत-अमेरिका डील: भारत की चुप्पी

रिपोर्ट्स के अनुसार, नई दिल्ली इस कॉल को लेकर इसलिए असहज थी क्योंकि बातचीत एकतरफा हो सकती थी और प्रधानमंत्री को कूटनीतिक रूप से कठिन स्थिति में डाल सकती थी। हालांकि, अब तक भारतीय वाणिज्य मंत्रालय या सरकार की ओर से लटनिक के “मिस्ड कॉल” दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में भारत सरकार इस दावे पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा मिल पाती है।

 

 

लेखक के बारे में

 

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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