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पुरुष महिलाओं की तुलना में कम उम्र क्यों जीते हैं? डॉक्टर ने बताए 5 बड़े कारण

पुरुष महिलाओं की तुलना में कम उम्र क्यों जीते हैं? डॉक्टर ने बताए 5 बड़े कारण

पुरुष महिलाओं की तुलना में औसतन कम क्यों जीते हैं? हार्मोन, जेनेटिक्स, आयरन, ‘डिस्पोज़ेबल पुरुष’ थ्योरी और शरीर के आकार समेत जानिए 5 वैज्ञानिक कारण।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 18 अगस्त, 2026 – दुनिया के लगभग हर हिस्से में एक दिलचस्प लेकिन गंभीर स्वास्थ्य पैटर्न देखने को मिलता है—महिलाएं औसतन पुरुषों से अधिक लंबी उम्र जीती हैं। यह अंतर केवल जीवनशैली या आधुनिक चिकित्सा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे हार्मोन, आनुवंशिकी, जैविक विकास, शरीर में आयरन का मेटाबॉलिज्म और यहां तक कि शरीर के आकार से जुड़े कई संभावित कारण हो सकते हैं।

पुरुष महिलाओं की तुलना में कम उम्र क्यों जीते हैं? डॉ. प्रियम बोरदोलोई के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर इस अंतर को विशेष रूप से अस्पतालों और इमरजेंसी विभागों में देखते हैं, जहां अधेड़ उम्र के पुरुष हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों के साथ पहुंचते हैं।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पुरुषों की कम औसत आयु किसी एक कारण का परिणाम नहीं है। यह जैविक और सामाजिक-व्यवहारिक कारकों के जटिल मेल का परिणाम है।

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1. हार्मोन पुरुषों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं

पुरुषों और महिलाओं के शरीर में सेक्स हार्मोन का स्तर और प्रभाव अलग होता है। इनमें टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में मांसपेशियों, हड्डियों, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और यौन विकास समेत कई प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है। लेकिन वैज्ञानिक साहित्य में यह भी चर्चा होती रही है कि एंड्रोजन से जुड़े कुछ जैविक प्रभाव पुरुषों में कुछ स्वास्थ्य जोखिमों को प्रभावित कर सकते हैं।

दूसरी तरफ, महिलाओं में प्रजनन आयु के दौरान एस्ट्रोजन हृदय और रक्त वाहिकाओं पर कुछ सुरक्षात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, मेनोपॉज के बाद यह लाभ कम हो जाता है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कोई एक हार्मोन सीधे पुरुषों की उम्र घटाता है। बल्कि हार्मोनल अंतर हृदय रोग, मेटाबॉलिज्म और उम्र बढ़ने की प्रक्रियाओं में वे कई योगदान देने वाले तत्वों में से एक हो सकते हैं।

2. जेनेटिक्स महिलाओं को दे सकते हैं जैविक फायदा

महिलाओं के पास आमतौर पर दो X क्रोमोसोम होते हैं, जबकि पुरुषों में एक X और एक Y क्रोमोसोम होता है।

X क्रोमोसोम पर बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण जीन मौजूद हैं। महिलाओं में किसी X क्रोमोसोम पर हानिकारक आनुवंशिक परिवर्तन होने पर दूसरा X कुछ मामलों में अतिरिक्त कार्यात्मक प्रतिलिपि प्रदान कर सकता है।

पुरुषों के पास केवल एक X क्रोमोसोम होने के कारण कुछ X- लिंक्ड आनुवंशिक विकार के मामले में उनके पास वही अतिरिक्त आनुवंशिक ‘बैकअप’ नहीं होता।

इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने माइटोकॉन्ड्रियल वंशागति और सेक्स-विशिष्ट प्राकृतिक चयन जैसे संभावित तंत्रों पर भी अध्ययन किया है। इसलिए महिलाओं का आनुवंशिक लाभ केवल X और Y क्रोमोसोम के अंतर से समझना पर्याप्त नहीं है।

3. शरीर में आयरन का जमा होना भी महत्वपूर्ण हो सकता है

यह कारण खास तौर पर दिलचस्प है।

पुरुषों में आयरन की मात्रा को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक रास्ता महिलाओं की तुलना में अलग तरह से काम करता है। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान नियमित रूप से रक्त और आयरन की कमी होती है। इससे जीवन के एक बड़े हिस्से में शरीर से आयरन निकलता रहता है।

पुरुषों और पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में यह नियमित रक्त हानि नहीं होती। परिणामस्वरूप, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में आयरन जमा होने की संभावना बढ़ सकती है।

बहुत अधिक आयरन शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और कोशिकीय क्षति से जुड़ा हो सकता है। कुछ वैज्ञानिकों ने इस आधार पर यह परिकल्पना रखी है कि जीवनभर आयरन के संचय और उम्र बढ़ने के बीच संबंध हो सकता है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य आयरन स्तर वाला हर पुरुष जोखिम में है या आयरन को कम करना जीवन बढ़ाने का प्रमाणित तरीका है। आयरन की कमी और अधिकता दोनों स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के आयरन सप्लीमेंट या उपचार लेना उचित नहीं है।

4. ‘डिस्पोज़ेबल पुरुष’ थ्योरी क्या कहती है?

यह विकासवादी जीवविज्ञान की एक दिलचस्प परिकल्पना है।

‘डिस्पोज़ेबल सोमा’ से संबंधित विचार यह समझाने की कोशिश करता है कि जीवों के शरीर में ऊर्जा और संसाधनों का इस्तेमाल प्रजनन और शरीर की मरम्मत/रखरखाव के बीच कैसे संतुलित होता है।

कुछ विकासवादी सिद्धांत के अनुसार, पुरुषों में प्रतिस्पर्धा, जोखिम लेने और प्रजनन सफलता से जुड़े व्यवहारों पर प्राकृतिक चयन का प्रभाव पड़ा हो सकता है। पुरुषों में जोखिम लेने, आक्रामक प्रतिस्पर्धा और चोट के खतरे से जुड़े व्यवहार कुछ आबादी में मृत्यु जोखिम बढ़ा सकते हैं।

लेकिन ‘डिस्पोज़ेबल पुरुष’ को पुरुषों की कम आयु का स्थापित एकमात्र वैज्ञानिक कारण मानना सही नहीं होगा। यह एक विकासवादी ढांचा/परिकल्पना है, जिसकी व्याख्या अन्य जैविक और सामाजिक कारकों के साथ मिलाकर करनी चाहिए।

5. बड़ा शरीर हमेशा लंबी उम्र का संकेत नहीं

आकार और उम्र बढ़ने के बीच भी एक दिलचस्प संबंध है।

कई प्रजातियों में बड़े शरीर वाले जानवर छोटे शरीर वाले जानवरों से अधिक लंबी उम्र जीते हैं। लेकिन प्रजातियों के भीतर अक्सर इसका उल्टा पैटर्न दिखाई दे सकता है—कुछ मामलों में बड़ा शरीर तेज विकास, अधिक ऊर्जा खर्च और कुछ उम्र-संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है।

पुरुषों का औसतन बड़ा शरीर और अधिक मांसपेशी द्रव्यमान उनके ऊर्जा खर्च, चयापचय और विकास संबंधी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।

फिर भी यह एक जटिल संबंध है। मनुष्यों में शरीर का आकार अकेले जीवन प्रत्याशा तय नहीं करता। मोटापा, मांसपेशी द्रव्यमान, कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस, पोषण और शारीरिक सक्रियता जैसे कारक कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

उम्र के अंतर का क्या महत्व है?

पुरुषों और महिलाओं की जीवन प्रत्याशा में अंतर को केवल ‘पुरुषों का शरीर कमजोर है’ कहकर समझना वैज्ञानिक रूप से अधूरा होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा पुरुषों की तुलना में अधिक है। लेकिन इस अंतर में जैविक कारकों के साथ-साथ धूम्रपान, शराब, काम से जुड़े जोखिम, दुर्घटनाएं, आत्महत्या, स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल और बीमारी का देर से पता चलना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यही वजह है कि पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा को समझने के लिए शरीर के अंदर होने वाली जैविक प्रक्रियाओं के साथ-साथ व्यवहार और समाज को भी देखना जरूरी है।

पुरुष महिलाओं की तुलना में कम उम्र क्यों जीते हैं? लंबी उम्र केलिएक्याकिया जा सकता है?

पुरुषों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि जैविक अंतर को नियति नहीं माना जाना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी, शराब का सीमित सेवन, स्वस्थ वजन, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी तथा समय पर स्वास्थ्य जांच जीवन की गुणवत्ता और संभावित रूप से स्वस्थ जीवनकाल को बेहतर बना सकते हैं।

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विशेष रूप से हृदय रोग के जोखिम को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। सीने में दबाव या दर्द, अचानक सांस फूलना, चेहरे या हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में दिक्कत या अचानक तेज सिरदर्द जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

निष्कर्ष यही है कि पुरुषों की कम औसत उम्र किसी एक ‘कमजोर शरीर’ की कहानी नहीं है। हार्मोन और जेनेटिक्स से लेकर आयरन मेटाबॉलिज्म, विकासवादी दबाव, शरीर के आकार और स्वास्थ्य व्यवहार तक कई कारक एक साथ काम करते हैं। इसलिए पुरुषों की लंबी उम्र की असली चुनौती केवल उम्र बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के वर्षों को बढ़ाना है।

 

 

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य, आयरन स्तर, हार्मोन या सप्लीमेंट से जुड़े निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लें।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लेखक के बारे में

अमित कौल

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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