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190 परमाणु हथियार और गिनती जारी: पाकिस्तान से आगे निकला भारत, क्या अब UK को भी पीछे छोड़ देगा?

190 परमाणु हथियार और गिनती जारी: पाकिस्तान से आगे निकला भारत, क्या अब UK को भी पीछे छोड़ देगा?

190 परमाणु हथियार और गिनती जारी:  भारत की परमाणु ताकत को लेकर एक नया आकलन वैश्विक रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 12 सितम्बर, 2026 – अमेरिका स्थित फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) के मुताबिक भारत के पास अब अनुमानित 190 परमाणु वॉरहेड हैं। पाकिस्तान का अनुमानित भंडार करीब 170 वॉरहेड है। यानी भारत लगभग 20 हथियारों के अंतर से पाकिस्तान से आगे है।

लेकिन कहानी केवल भारत और पाकिस्तान की तुलना तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन की कुल परमाणु इन्वेंटरी करीब 225 वॉरहेडों की आंकी गई है। यदि भारत आने वाले वर्षों में अपना मौजूदा विस्तार जारी रखता है, तो दोनों देशों के बीच फिलहाल करीब 35 वॉरहेड का अंतर और कम हो सकता है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है—ये संख्याएं भारत सरकार द्वारा घोषित आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं। परमाणु हथियारों से जुड़ी जानकारी अत्यधिक गोपनीय होती है और FAS जैसे संस्थान सार्वजनिक सूचनाओं, सरकारी दस्तावेजों, उपग्रह तस्वीरों और अन्य ओपन-सोर्स सूचनाओं का विश्लेषण करके ऐसे अनुमान तैयार करते हैं।

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FAS का नया आकलन क्या कहता है?

FAS के न्यूक्लियर इन्फॉर्मेशन प्रोजेक्ट से जुड़े परमाणु विशेषज्ञ हैंस क्रिस्टेंसन के 2026 के आकलन के मुताबिक भारत ने हाल के वर्षों में अपने परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण जारी रखा है।

आकलन के अनुसार, भारत के पास 160 से अधिक ऐसे वॉरहेड हो सकते हैं जो मौजूदा परिचालन डिलीवरी सिस्टम से जुड़े हैं, जबकि लगभग 30 अतिरिक्त वॉरहेड नई मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन और भविष्य की तैनाती से संबंधित माने गए हैं।

यही कारण है कि भारत की परमाणु क्षमता को केवल “कितने परमाणु बम हैं” के नजरिए से देखना अधूरा होगा। असली रणनीतिक तस्वीर यह है कि उन हथियारों को कितनी दूर, कितनी तेजी और कितने सुरक्षित तरीके से लक्ष्य तक पहुंचाया जा सकता है।

190 परमाणु हथियार और गिनती जारी: SIPRI ने भी लगाया 190 का अनुमान

दिलचस्प बात यह है कि FAS अकेला ऐसा संस्थान नहीं है जो भारत के परमाणु भंडार को करीब 190 आंक रहा है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भी अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान लगाया है। पाकिस्तान के लिए उसका अनुमान करीब 170 है।

SIPRI के अनुसार, 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर करीब 12,187 परमाणु हथियार थे। इनमें लगभग 9,745 सैन्य भंडार में संभावित इस्तेमाल के लिए उपलब्ध माने गए।

पाकिस्तान से आगे निकलना कितना महत्वपूर्ण?

भारत और पाकिस्तान दोनों ने 1998 में परमाणु परीक्षण किए थे और तब से दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में परमाणु प्रतिरोध एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है।

लेकिन भारत की रणनीतिक चुनौती अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं मानी जाती है।

भारत के परमाणु आधुनिकीकरण में चीन एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारक बन चुका है। SIPRI के मुताबिक भारत के नए लंबी दूरी के हथियारों के विकास में ऐसे सिस्टम पर जोर बढ़ा है जो चीन के भीतर दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम हों।

यही बदलाव भारत की परमाणु रणनीति को दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्विता से आगे व्यापक एशियाई रणनीतिक संतुलन की तरफ ले जाता दिखाई देता है।

जमीन, हवा और समुद्र—क्यों महत्वपूर्ण है परमाणु त्रयी?

किसी परमाणु शक्ति की वास्तविक क्षमता केवल उसके वॉरहेड की संख्या से तय नहीं होती। उसकी परमाणु त्रयी—यानी जमीन से मिसाइल, लड़ाकू विमान और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता—रणनीतिक प्रतिरोध का अहम आधार होती है।

विशेष रूप से समुद्र आधारित परमाणु क्षमता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पनडुब्बियों को ढूंढना और पहले हमले में नष्ट करना बेहद कठिन होता है। इससे किसी देश के पास दुश्मन के परमाणु हमले के बाद भी जवाबी हमला करने की क्षमता बची रह सकती है।

इसे रणनीतिक भाषा में सेकंड-स्ट्राइक कैपेबिलिटी कहा जाता है और विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोध के लिए इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

190 परमाणु हथियार और गिनती जारी: क्या भारत वास्तव में UK को पीछे छोड़ सकता है?

FAS के 2026 आंकड़ों के मुताबिक UK का कुल परमाणु इन्वेंटरी लगभग 225 और भारत का करीब 190 है।

अंतर सिर्फ 35 वॉरहेड का है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत का ब्रिटेन को पीछे छोड़ना निश्चित है। परमाणु शस्त्रागार का आकार राजनीतिक फैसलों, परमाणु सामग्री की उपलब्धता, नई मिसाइलों की तैनाती और राष्ट्रीय परमाणु नीति सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।

इसलिए ज्यादा सटीक निष्कर्ष यह होगा कि भारत और UK के अनुमानित परमाणु भंडार के बीच अंतर काफी कम हो गया है और भारत के पास आगे विस्तार की तकनीकी क्षमता मौजूद हो सकती है।

दुनिया की परमाणु तस्वीर में भारत कहां खड़ा है?

2026 के FAS अनुमानों में रूस और अमेरिका अभी भी बाकी दुनिया से बहुत आगे हैं। रूस की कुल इन्वेंटरी लगभग 5,420 और अमेरिका की लगभग 5,042 आंकी गई हैं।

इसके बाद चीन करीब 620, फ्रांस करीब 370, UK 225, भारत 190, पाकिस्तान 170, इजरायल 90 और उत्तर कोरिया करीब 60 वॉरहेड के साथ आते हैं।

यानी भारत की बढ़ती क्षमता महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन अमेरिका और रूस के विशाल शस्त्रागार से तुलना करने पर अंतर अभी भी बहुत बड़ा है।

190 परमाणु हथियार और गिनती जारी: 190 का आंकड़ा ताकत के साथ चेतावनी भी है

भारत के लिए 190 परमाणु वॉरहेड का अनुमान निश्चित रूप से उसकी बढ़ती रणनीतिक क्षमता की तरफ इशारा करता है। पाकिस्तान से संख्यात्मक बढ़त और UK से घटता अंतर इस बदलाव को और महत्वपूर्ण बनाते हैं।

लेकिन परमाणु हथियारों की दुनिया में संख्या हमेशा पूरी कहानी नहीं बताती।

मिसाइलों की रेंज, उनकी सटीकता, जीवित रहने की क्षमता, कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम, पनडुब्बी आधारित प्रतिरोध और सबसे बढ़कर राजनीतिक सिद्धांत—ये सभी मिलकर तय करते हैं कि किसी देश का परमाणु प्रतिरोध कितना विश्वसनीय है।

और इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—जब चीन, भारत और पाकिस्तान तीनों अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं का आधुनिकीकरण कर रहे हैं, तो क्या एशिया अधिक सुरक्षित हो रहा है, या परमाणु प्रतिस्पर्धा का एक नया दौर शुरू हो चुका है?

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आने वाले वर्षों में शायद यही सवाल 190 वॉरहेड की संख्या से भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होगा।

मेटा डिस्क्रिप्शन: भारत के पास अब अनुमानित 190 परमाणु वॉरहेड हैं, जो पाकिस्तान के 170 से अधिक हैं। FAS के 2026 आकलन के बादजानिए क्या भारत UK के 225 वॉरहेड के आंकड़े को भी पीछे छोड़ सकता है।

 

 

 

 

 

 

लेखक के बारे में

अमित कौल

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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