भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का हकदार: प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा से पहले मिला बड़ा वैश्विक समर्थन, क्या अब बदलेगा संयुक्त राष्ट्र का समीकरण?
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का हकदार: प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा से पहले मिला बड़ा वैश्विक समर्थन, क्या अब बदलेगा संयुक्त राष्ट्र का समीकरण?
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का हकदार: सेशेल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन किया। जानिए क्यों भारत की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की जरूरत क्या है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का हकदार: भारत की संयुक्तराष्ट्रसुरक्षापरिषद दावेदारी को सेशेल्स का समर्थन, वैश्विक मंच पर बढ़ी नई दिल्ली की ताकत
अमित कौल | डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 27 जून, 2026 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा से ठीक पहले भारत को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण समर्थन मिला है। सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्य बनने का पूरा हकदार है। उन्होंने न केवल भारत की दावेदारी का समर्थन किया, बल्कि यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब बदल चुकी है और संयुक्त राष्ट्र की संरचना में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से उठा रहा है।
भारत क्यों है स्थायी सदस्यता का मजबूत दावेदार?
सेशेल्स के विदेश मंत्री ने भारत की दावेदारी के पीछे कई ठोस कारण गिनाए। उनके अनुसार भारत केवल दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश ही नहीं है, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना, समुद्री सुरक्षा, विकास सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति में भी महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।
भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में दशकों से सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत अभियानों और विकासशील देशों के साथ साझेदारी ने उसकी वैश्विक विश्वसनीयता को और मजबूत किया है।
फॉरे का कहना है कि इन सभी कारणों से भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर दावा पूरी तरह उचित है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की मांग क्यों तेज हो रही है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना वर्ष 1945 की वैश्विक परिस्थितियों को दर्शाती है। उस समय दुनिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था आज से बिल्कुल अलग थी।
आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा परिषद में उनका प्रतिनिधित्व उसी अनुपात में नहीं बढ़ा।
सेशेल्स ने भी इसी असंतुलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत जैसे देशों और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि संयुक्त राष्ट्र अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधिक संस्था बन सके।
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का हकदार: भारत को समर्थन मिलने का क्या है कूटनीतिक महत्व?
सेशेल्स भले ही भौगोलिक रूप से छोटा द्वीपीय राष्ट्र हो, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में उसका रणनीतिक महत्व काफी बड़ा है।
ऐसे देशों का सार्वजनिक समर्थन भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि केवल बड़ी शक्तियां ही नहीं बल्कि छोटे और विकासशील देश भी वैश्विक शासन व्यवस्था में भारत की बड़ी भूमिका चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जितने अधिक देशों का समर्थन भारत को मिलेगा, भविष्य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की बहस उतनी ही प्रभावशाली होती जाएगी।
भारत-सेशेल्स संबंध क्यों हैं खास?
भारत और सेशेल्स के संबंध वर्ष 1976 में सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय से लगातार मजबूत होते रहे हैं।
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास परियोजनाओं में व्यापक सहयोग रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देश लंबे समय से मिलकर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा इन संबंधों को और अधिक रणनीतिक गहराई देने वाली मानी जा रही है।
राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में “गेस्ट ऑफ ऑनर” के रूप में शामिल हो रहे हैं। यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत विश्वास और बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का संकेत माना जा रहा है।
यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
क्या जल्द बदल सकता है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्वरूप?
हालांकि भारत को अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन सहित कई देशों का समर्थन पहले से मिलता रहा है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा बेहद जटिल है। किसी भी बड़े बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन आवश्यक होगा, जिसके लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति चाहिए।
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फिर भी भारत को लगातार बढ़ता वैश्विक समर्थन इस बात का संकेत है कि विश्व व्यवस्था में बदलाव की मांग अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।
निष्कर्ष
सेशेल्स द्वारा भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद स्थायी सदस्यता का खुला समर्थन केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है। भारत आज आर्थिक शक्ति, रणनीतिक प्रभाव, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक शांति में योगदान के कारण विश्व मंच पर पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यदि संयुक्त राष्ट्र वास्तव में 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहता है, तो भारत जैसे देशों को निर्णय लेने की सर्वोच्च संस्था में स्थायी प्रतिनिधित्व देने की बहस आने वाले वर्षों में और तेज होती दिखाई दे सकती है।
लेखक के बारे में:
अमित कौल
अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।
