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भाईचारे का संदेश देने वाले कश्मीरी पंडित को प्रताड़ित कर मार डाला गया: कौन थे सर्वानंद कौल प्रेमी?

भाईचारे का संदेश देने वाले कश्मीरी पंडित को प्रताड़ित कर मार डाला गया: कौन थे सर्वानंद कौल प्रेमी?

सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ कौन थे? जानिए कश्मीरी कवि, शिक्षक और समाजसेवी की कहानी, 1990 में बेटे वीरेंद्र के साथ उनकी हत्या और 36 साल बाद SIA की जांच से जुड़े नए घटनाक्रम के बारे में।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 16 अगस्त, 2026 – कश्मीर की कहानी सिर्फ़ पहाड़ों, झेलम, चिनार और बर्फ़ से नहीं बनी। यह उन लोगों की कहानी भी है जिन्होंने कठिन से कठिन दौर में सांप्रदायिक सद्भाव, साहित्य और इंसानी रिश्तों को बचाए रखने की कोशिश की। सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ ऐसे ही लोगों में शामिल थे।

कश्मीरी पंडित कवि, शिक्षक, लेखक और समाजसेवी प्रेमी ने अपनी जिंदगी कश्मीर की साझा संस्कृति और भाईचारे के विचार को मजबूत करने में लगाई। लेकिन 1990 में घाटी में आतंकवाद के शुरुआती दौर में वह और उनके 27 वर्षीय बेटे वीरेंद्र कौल हिंसा का शिकार हो गए। अब 36 साल बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस की State Investigation Agency (SIA) ने इस दोहरे हत्याकांड की जांच में नौ स्थानों पर तलाशी ली है।

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि कश्मीर के उस दौर का प्रतीक है जब भय और हिंसा ने सामाजिक ताने-बाने को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।

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कौन थे सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’?

सर्वानंद कौल प्रेमी का जन्म 2 नवंबर 1924 को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के सोफ शाली गांव में हुआ था। वे कवि, लेखक, शोधकर्ता, पत्रकार, शिक्षक, समाज सुधारक और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता थे। साहित्य के प्रति उनके योगदान और कश्मीर से प्रेम के कारण प्रसिद्ध कश्मीरी कवि गुलाम अहमद महजूर ने उन्हें ‘प्रेमी’ नाम दिया था।

प्रेमी का जीवन केवल साहित्य तक सीमित नहीं था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया और आगे चलकर स्कूल हेडमास्टर बने। उनकी पहचान एक ऐसे शिक्षक की थी जो विद्यार्थियों और समाज के बीच सम्मान रखते थे।

उनकी साहित्यिक रुचियां भी व्यापक थीं। उन्होंने कश्मीरी भाषा में धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक रचनाओं तथा अनुवादों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘कलामी प्रेमी’, ‘पयामी प्रेमी’, ‘रूड़ जेरी’, ‘ओश त वुश’ और ‘भक्ति कुसुम’ जैसी रचनाओं का उल्लेख मिलता है। उन्होंने भगवद्गीता और रवींद्रनाथ टैगोर की ‘गीतांजलि’ सहित कई महत्वपूर्ण ग्रंथों का कश्मीरी में अनुवाद भी किया।

यही वजह है कि प्रेमी को सिर्फ़ कश्मीरी पंडित साहित्यकार के तौर पर देखना उनकी विरासत को छोटा करना होगा। उनका काम कश्मीर की साझा सांस्कृतिक परंपरा और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद की भावना से भी जुड़ा था।

सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ कौन थे? 1990 में क्यों नहीं छोड़ा कश्मीर?

1990 में घाटी में आतंकवाद और हिंसा का दौर तेज हो चुका था। बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित परिवार घाटी से बाहर जाने लगे थे। ऐसे माहौल में प्रेमी के परिवार ने भी कश्मीर छोड़ने के बजाय अपने पुश्तैनी गांव में रहने का फैसला किया।

इस फैसले के पीछे सिर्फ़ अपनी जमीन और घर से भावनात्मक जुड़ाव नहीं था। प्रेमी ने वर्षों तक समाज में जो सम्मान और सद्भाव अर्जित किया था, परिवार को विश्वास था कि वह कठिन समय में उनकी रक्षा करेगा।

लेकिन 29 अप्रैल 1990 की रात यह भरोसा भयावह तरीके से टूट गया।

वह बारिश वाली रात जब सब बदल गया

रिपोर्टों के अनुसार, उस रात हथियारबंद आतंकवादी प्रेमी के घर पहुंचे और उन्हें एक ‘कमांडर’ से मिलने के लिए साथ चलने को कहा। उनके बेटे वीरेंद्र को स्थिति संदिग्ध लगी और वह भी अपने पिता के साथ चला गया।

इसके बाद दोनों घर वापस नहीं लौटे।

1 मई 1990 को प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र के शव बरामद हुए। समकालीन और बाद की रिपोर्टों में उनके साथ बर्बरता किए जाने का उल्लेख मिलता है। प्रेमी के बड़े बेटे राजिंदर कौल ने वर्षों बाद उस रात और उसके बाद परिवार पर पड़े असर को याद करते हुए अपने पिता और भाई की हत्या पर सवाल उठाए थे।

इस घटना की सबसे त्रासद विडंबना यह थी कि जिस व्यक्ति ने अपना जीवन सद्भाव और साहित्य को समर्पित किया, वह उसी सामाजिक हिंसा का शिकार बना जिसने कश्मीर की बहुलतावादी संस्कृति को गहरी चोट पहुंचाई।

बारिश और ‘रूड़ जेरी’ का दर्दनाक रिश्ता

प्रेमी की कहानी में बारिश महज मौसम नहीं रह जाती।

उनकी प्रसिद्ध कश्मीरी कविता ‘रूड़ जेरी’ का संबंध बारिश से बताया जाता है। उनके बेटे राजिंदर कौल ने 2020 में India Today से बातचीत में याद किया था कि उनके पिता ने गर्मी के मौसम में हुई भारी बारिश से प्रेरित होकर यह कविता लिखी थी।

यही कारण है कि 1990 की वह बरसाती रात प्रेमी की साहित्यिक विरासत के साथ एक बेहद दर्दनाक समानांतर बन गई—जिस बारिश को एक कवि ने कविता में जीवन और प्रकृति की अनुभूति के रूप में देखा था, वही बारिश उनके परिवार के लिए हमेशा के लिए भय और शोक की स्मृति बन गई।

36 साल बाद फिर क्यों चर्चा में हैं प्रेमी?

12 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर पुलिस की SIA ने प्रेमी और उनके बेटे की 1990 की हत्या से जुड़े मामले में जम्मू-कश्मीर के नौ स्थानों पर तलाशी ली। यह मामला मूल रूप से अनंतनाग के डूरू पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है और अब इसकी जांच SIA कर रही है।

जांच एजेंसी के सामने चुनौती आसान नहीं है। तीन दशक से अधिक पुराने मामले में घटनास्थल से जुड़े सबूत, गवाहों की उपलब्धता और उस समय की परिस्थितियों को फिर से जोड़ना बेहद कठिन हो सकता है। फिर भी किसी पुराने मामले को दोबारा जांच के दायरे में लाना पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की संभावना को फिर से जीवित करता है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SIA ने 1990 में हुई एक अन्य चर्चित कश्मीरी पंडित हत्या—नर्स सरला भट के मामले—की जांच भी आगे बढ़ाई है।

सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ कौन थे? प्रेमी की विरासत सिर्फ़ एक हत्या की कहानी नहीं

सर्वानंद कौल प्रेमी को याद करने का अर्थ सिर्फ़ उनकी हत्या को याद करना नहीं है। इसका अर्थ उस विचार को याद करना भी है जिसे उन्होंने अपने जीवन और साहित्य से आगे बढ़ाया—कि कश्मीर की पहचान केवल धार्मिक विभाजन से नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, भाषा, साहित्य और इंसानी रिश्तों से बनती है।

उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा विरोधाभास यही था: जिस व्यक्तिने भाईचारे की भाषा लिखी, उसे हिंसा ने खामोश कर दिया।

लेकिन साहित्य में विचारों की एक विशेष ताकत होती है। व्यक्ति को चुप कराया जा सकता है, मगर उसकी रचनाओं और विचारों को हमेशा के लिए मिटाना आसान नहीं होता।

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आज जब 36 साल पुराने इस मामले में जांच फिर चर्चा में है, सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ की कहानी एक बार फिर सामने आती है—एक कवि की, एक शिक्षक की, एक समाजसेवी की और ऐसे कश्मीरी की जिसने मुश्किल दौर में भी अपने समाज की साझा विरासत पर विश्वास बनाए रखा।

उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल शायद यही है: क्या हिंसा किसी इंसान की जान ले सकती है, लेकिन उसके भाईचारे और इंसानियत के विचार को भी खत्म कर सकती है?

प्रेमी की विरासत इसका जवाब देती है—नहीं।

 

 

 

 

 

 

लेखक के बारे में

अमित कौल

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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