Wednesday, July 1, 2026
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राम मंदिर दान चोरी मामला: कुंभ मेले के दौरान हुई सबसे बड़ी सेंध, जीजा-साले की जोड़ी समेत 8 आरोपी जांच के घेरे में

राम मंदिर दान चोरी मामला: कुंभ मेले के दौरान हुई सबसे बड़ी सेंध, जीजा-साले की जोड़ी समेत 8 आरोपी जांच के घेरे में

राम मंदिर दान चोरी मामला: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ा खुलासा। पुलिस के अनुसार सबसे बड़ी नकदी चोरी कुंभ मेले के दौरान हुई। जीजा-साले की जोड़ी, बैंक कर्मचारियों की कथित भूमिका, करोड़ों की संपत्ति और मनी ट्रेल की जांच पर पढ़ें विस्तृत विश्लेषण।

राम मंदिर दान चोरी मामला: कुंभ मेले के दौरान हुई सबसे बड़ी सेंध, जांच में रोज़ हो रहे नए खुलासे

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 1 जुलाई 2026 – देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में सामने आए तथ्यों ने इस पूरे मामले को केवल चोरी तक सीमित नहीं रहने दिया है, बल्कि यह वित्तीय अनियमितताओं, कथित अंदरूनी मिलीभगत और मनी ट्रेल की व्यापक जांच का विषय बन गया है।

पुलिस का दावा है कि सबसे बड़ी नकदी चोरी 2025 की शुरुआत में आयोजित कुंभ मेले के दौरान हुई, जब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और दान राशि सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक थी। इसी भीड़ और भारी नकद प्रवाह का कथित तौर पर आरोपियों ने फायदा उठाया।

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कुंभ मेले की भीड़ बनी सबसे बड़ा अवसर

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पहले भी छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं में शामिल रहे थे। लेकिन कुंभ मेले के दौरान मंदिर में दान की मात्रा में अचानक आई भारी वृद्धि ने उन्हें कथित रूप से बड़ी रकम निकालने का अवसर दिया।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से काम करते हुए नकद दान की गिनती और उसके प्रबंधन की प्रक्रिया का लाभ उठाया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह घटना लंबे समय से चल रही किसी संगठित साजिश का हिस्सा थी या फिर विशेष अवसर का फायदा उठाकर अंजाम दी गई।

राम मंदिर दान चोरी मामला: आठ आरोपी गिरफ्तार, कई घंटे चली पूछताछ

अब तक SIT इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं।

पुलिस ने इन सभी से कई घंटों तक पूछताछ की। जांच एजेंसियों का दावा है कि सभी आरोपी कथित साजिश की योजना बनाने और उसे लागू करने में किसी न किसी रूप में शामिल थे। हालांकि, अदालत में आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और जांच जारी है।

जीजा-साले की जोड़ी पर सबसे गंभीर आरोप

जांच में सबसे अधिक चर्चा लव कुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा की भूमिका को लेकर हो रही है। पुलिस के अनुसार, यह जीजा-साले की जोड़ी कथित रूप से चोरी गई रकम का सबसे बड़ा हिस्सा अपने पास रखने में सफल रही।

प्राथमिक जांच में उनके नाम से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक संपत्तियों का पता चला है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन संपत्तियों की खरीद में कथित चोरी की रकम का इस्तेमाल हुआ या नहीं।

इसी कारण आयकर विभाग की सहायता भी ली जा रही है ताकि आरोपियों की आय, संपत्ति और बैंक खातों का विस्तृत वित्तीय विश्लेषण किया जा सके।

राम मंदिर दान चोरी मामला: बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच का सबसे संवेदनशील पहलू स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका है।

राम मंदिर में दान की नकदी की गिनती SBI की निगरानी में होती है। इसके लिए एक निजी एजेंसी नियुक्त की गई है और 14 सदस्यीय टीम इस प्रक्रिया को पूरा करती है, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के तीन प्रतिनिधि शामिल रहते हैं।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या नकदी की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई थी। इसी उद्देश्य से मनी ट्रेल की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है।

राम मंदिर दान चोरी मामला: कंबलों में छिपाकर रखी गई थी नकदी

जांच के दौरान सबसे बड़ी बरामदगी आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी बताई गई। पुलिस के अनुसार, उसके कौशालपुरी स्थित एक ठिकाने से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, नकदी चार बक्सों में रखे कंबलों के भीतर छिपाई गई थी। इनमें से एक बक्से पर कथित रूप से “राम राज्य कोष” लिखा हुआ था।

योग सेंटर संचालिका सीमा तिवारी ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को छापा मारकर नकदी बरामद की। वहीं आरोपी के परिजनों ने अलग-अलग दावे किए हैं, जिनकी भी जांच जारी है।

टिन्नू यादव और चाबी का रहस्य

जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार, दान गिनने वाले कमरे की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी।

टिन्नू यादव पहले मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रह चुके थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर नकदी बाहर निकाली गई।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

राम मंदिर दान चोरी मामला: आय से अधिक लेन-देन ने बढ़ाए संदेह

पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय दस्तावेजों की जांच में पाया कि पिछले एक वर्ष के दौरान कई खातों में ऐसा लेन-देन हुआ जो उनकी घोषित आय से काफी अधिक था।

इसी आधार पर आयकर विभाग और अन्य वित्तीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। यदि मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध निवेश के प्रमाण मिलते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

आगे की जांच पर टिकी निगाहें

अब तक की जांच में पुलिस लगभग 89 लाख रुपये नकद बरामद करने का दावा कर चुकी है। यह राशि आरोपी अविनाश शुक्ला से मिली जानकारी के आधार पर बरामद हुई थी। पुलिस के अनुसार, यह रकम एफआईआर दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट के पास वापस पहुंचा दी गई थी।

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हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब भी बाकी हैं—क्या यह पूरी चोरी केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित थी, या इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था? क्या बैंकिंग प्रक्रिया में सुरक्षा संबंधी खामियां थीं, या किसी स्तर पर अंदरूनी सहयोग मिला?

इन सभी सवालों के जवाब SIT, आयकर विभाग और संभावित ED जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल यह मामला केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था की कसौटी भी बन चुका है।

 

 

 

 

 

लेखक के बारे में

अमित कौल

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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