Wednesday, June 24, 2026
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किश्तवाड़ में दो आतंकी सहयोगी गिरफ्तार, सरकारी स्कूल टीचर भी निकला जैश आतंकियों का मददगार

किश्तवाड़ में दो आतंकी सहयोगी गिरफ्तार, सरकारी स्कूल टीचर भी निकला जैश आतंकियों का मददगार

किश्तवाड़ में दो आतंकी सहयोगी गिरफ्तार: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में पुलिस ने दो आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक सरकारी स्कूल टीचर भी शामिल है, जिस पर जैश-ए-मोहम्मद आतंकियों को पनाह, खाना और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का आरोप है। जानिए इस कार्रवाई का पूरा विश्लेषण।

अमित कौल  |  डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 13 मई, 2026 – जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक सरकारी स्कूल का शिक्षक भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, इन दोनों पर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के विदेशी आतंकियों को पनाह, भोजन और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप है।

यह मामला केवल दो लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में आतंकियों को मिलने वाले स्थानीय समर्थन नेटवर्क की गहराई को भी उजागर करता है। खासकर तब, जब एक शिक्षक जैसे जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति कथित रूप से आतंकियों की मदद करता पाया गया हो।

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किश्तवाड़ में दो आतंकी सहयोगी गिरफ्तार: कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिंहपोरा बेगपोरा निवासी मशकूर अहमद और बांडियां नाइडगाम निवासी मुनीर अहमद के रूप में हुई है। मशकूर अहमद स्कूल शिक्षा विभाग में सरकारी शिक्षक के तौर पर कार्यरत था। उसे वर्ष 2004 में ‘रहबर-ए-तालीम’ (ReT) शिक्षक नियुक्त किया गया था और 2009 में उसकी सेवाएं नियमित कर दी गई थीं।

आरोप है कि इन दोनों ने जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर सैफुल्लाह बलूची समेत तीन विदेशी आतंकियों को चतरू इलाके में सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया था। यही आतंकी बाद में 22 फरवरी को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे।

किश्तवाड़ क्यों बन रहा है आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना?

पिछले कुछ वर्षों में किश्तवाड़ का ऊपरी इलाका, विशेषकर चतरू क्षेत्र, आतंकियों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं—

  1. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र
  2. घने जंगल
  3. सीमित सड़क संपर्क
  4. दूर-दराज के गांव
  5. स्थानीय मददगारों का नेटवर्क

विशेषज्ञों का मानना है कि घाटी में लगातार दबाव बढ़ने के बाद आतंकी संगठन जम्मू क्षेत्र के पहाड़ी जिलों की ओर अपने नेटवर्क को शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। राजौरी, पुंछ, डोडा और किश्तवाड़ जैसे इलाके अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं।

किश्तवाड़ में दो आतंकी सहयोगी गिरफ्तार: पुलिस की कार्रवाई और बड़ा खुलासा

किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नरेश सिंह ने कहा कि यह गिरफ्तारी राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियान का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि मशकूर अहमद विदेशी आतंकियों के लिए बनाए गए ठिकाने को सुरक्षित रखने में सीधे तौर पर शामिल था।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल थे।

इस पूरे मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा तब हुआ, जब सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई। तस्वीर में जैश कमांडर सैफुल्लाह बलूची को नोटों की माला पहनाई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, यह तस्वीर मशकूर अहमद के घर में खींची गई थी। यदि जांच में यह दावा सही साबित होता है, तो यह स्थानीय स्तर पर आतंकियों के लिए मौजूद वैचारिक समर्थन को भी उजागर करेगा।

जंगल में मिला था आतंकियों का ठिकाना

यह कार्रवाई जनवरी में हुए उस बड़े ऑपरेशन के बाद सामने आई, जिसमें सिंहपोरा के जंगलों के भीतर एक छिपा हुआ आतंकी ठिकाना बरामद किया गया था। सुरक्षा बलों को वहां से भारी मात्रा में राशन, कंबल और खाना पकाने का सामान मिला था, जो करीब चार महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता था।

इस बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों को यह संकेत दिया था कि आतंकियों को लंबे समय तक जीवित रहने के लिए मजबूत स्थानीय सहायता मिल रही थी। अब इन गिरफ्तारियों ने उस शक को काफी हद तक सही साबित कर दिया है।

किश्तवाड़ में दो आतंकी सहयोगी गिरफ्तार: सरकारी संस्थानों में घुसपैठ चिंता का विषय

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सरकारी संस्थानों में भी कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोग सक्रिय हैं? एक शिक्षक का आतंकी नेटवर्क से जुड़ना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक सुरक्षा का भी गंभीर विषय है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में यदि किसी शिक्षक पर आतंकियों की मदद करने का आरोप लगता है, इसलिए, यह युवाओं के भविष्य के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था के लिए भी चिंताजनक है।

सूत्रों के मुताबिक, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जल्द ही मशकूर अहमद की सेवाएं समाप्त करने का फैसला ले सकते हैं।

आतंकवाद के खिलाफ नई रणनीति की जरूरत

किश्तवाड़ की यह घटना दिखाती है कि आतंकवाद केवल सीमा पार से घुसपैठ का मुद्दा नहीं रह गया है। अब आतंकी संगठन स्थानीय नेटवर्क, लॉजिस्टिक सपोर्ट और वैचारिक मदद के जरिए अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता, खुफिया नेटवर्क की मजबूती और कट्टरपंथ के खिलाफ सामाजिक अभियान चलाना भी उतना ही जरूरी है।

किश्तवाड़ में हुई ये गिरफ्तारियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता जरूर हैं, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी हैं कि आतंकियों के समर्थन तंत्र को खत्म किए बिना स्थायी शांति स्थापित करना आसान नहीं होगा।

 

 

 

लेखक के बारे में

अमित कौल

अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

 

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