ऑपरेशन शेरवाली: राजौरी के जंगलों में आतंकियों पर सेना का बड़ा शिकंजा, अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
ऑपरेशन शेरवाली: राजौरी के जंगलों में आतंकियों पर सेना का बड़ा शिकंजा, अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
राजौरी के दोरीमल-गंभीर मोगला जंगलों में चल रहे ‘ऑपरेशन शेरवाली’ के चौथे दिन भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने आतंकियों के ठिकानों पर बड़ा हमला किया। अमरनाथ यात्रा और ईद-उल-अज़हा से पहले घाटी में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
अमित कौल | डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 27 मई, 2026 – जम्मू-कश्मीर के राजौरी ज़िले में चल रहा आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन शेरवाली’ अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचता दिखाई दे रहा है। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त कार्रवाई ने आतंकियों के नेटवर्क पर जबरदस्त दबाव बना दिया है। चौथे दिन में प्रवेश कर चुके इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने दोरीमल-गंभीर मोगला के घने जंगलों में छिपे विदेशी आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए नए सिरे से हमला शुरू किया।
राजौरी का यह इलाका लंबे समय से आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। प्राकृतिक गुफाओं, घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह क्षेत्र आतंकवादियों के छिपने के लिए उपयुक्त माना जाता है। लेकिन इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने आधुनिक तकनीक और बहु-स्तरीय रणनीति के जरिए आतंकियों को चारों तरफ से घेरने की कोशिश तेज़ कर दी है।
23 मई को पहली मुठभेड़ के बाद से सुरक्षा बल लगातार जंगलों की कॉम्बिंग कर रहे हैं। सेना ने हेलीकॉप्टरों के जरिए हवाई निगरानी शुरू की है, जबकि ड्रोन कैमरों और स्निफर डॉग्स की मदद से आतंकियों की गतिविधियों और उनके भागने के रास्तों का पता लगाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को कुछ स्थानों पर खून के निशान भी मिले हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि हालिया कार्रवाई में कुछ आतंकी घायल हुए हैं।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक मंगलवार को जंगल के भीतर संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाकर भारी गोलीबारी की गई। कई इलाकों से धमाकों और गोलियों की आवाज़ें सुनाई दीं, जबकि कुछ स्थानों से घना धुआँ उठता देखा गया। हालाँकि देर शाम तक किसी आतंकी के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आतंकियों का बाहरी घेरा लगभग पूरी तरह सील कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल आतंकियों को मार गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उनके लॉजिस्टिक नेटवर्क और स्थानीय सपोर्ट सिस्टम को भी तोड़ना है। पिछले कुछ वर्षों में राजौरी और पुंछ क्षेत्र में विदेशी आतंकियों की सक्रियता बढ़ी है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन इन इलाकों के दुर्गम जंगलों का इस्तेमाल घुसपैठ और छिपने के लिए करते रहे हैं। ऐसे में ‘ऑपरेशन शेरवाली’ को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
इस अभियान का समय भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ईद-उल-अज़हा और श्री अमरनाथ यात्रा-2026 शुरू होने वाली है। हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा में शामिल होते हैं, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन जाती है। आतंकी संगठन अक्सर बड़े धार्मिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले मौकों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। इसी खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं।
इसी संदर्भ में जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर पुलिस, CRPF, ITBP, रेलवे सुरक्षा बल, ट्रैफिक पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य ईद-उल-अज़हा और श्री अमरनाथ यात्रा-2026 के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना था।
बैठक में DGP ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घाटी की सभी प्रमुख मस्जिदों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा इंतज़ाम किए जाएँ। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, अचानक निरीक्षण करने और गश्त तेज़ करने पर विशेष ज़ोर दिया। इसके अलावा, आने वाली CAPF कंपनियों के लिए प्रशासनिक और लॉजिस्टिक तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढाँचा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की आक्रामक रणनीति ने आतंकियों के लिए काम करना बेहद मुश्किल बना दिया है। ड्रोन सर्विलांस, रियल टाइम इंटेलिजेंस और संयुक्त ऑपरेशन मॉडल ने आतंकवाद विरोधी अभियानों की क्षमता को पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी बनाया है।
https://vartaprabhat.com/pahalgam-terror-attack-nia-chargesheet-full-timeline-gopro-kill-zone/
राजौरी में चल रहा ‘ऑपरेशन शेरवाली’ केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनाए रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन के नतीजे यह तय करेंगे कि सुरक्षा बल आतंकियों के नेटवर्क को कितनी गहराई तक कमजोर करने में सफल होते हैं। फिलहाल पूरा इलाका सुरक्षा घेरे में है और एजेंसियाँ किसी भी संभावित खतरे को खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
लेखक के बारे में:
अमित कौल
अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।
