ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार: 12 दिन बाद भोपाल में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार: 12 दिन बाद भोपाल में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार: भोपाल में 12 दिन बाद ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार किया गया। दूसरे पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार ने नम आंखों से बेटी को अंतिम विदाई दी। इस मामले ने देशभर में दहेज उत्पीड़न और न्याय व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अमित कौल | डिजिटल डेस्क के लिए | बेंगलुरु | 24 मई, 2026 – त्विशा शर्मा की मौत के बारह दिन बाद, 33 वर्षीय का अंतिम संस्कार रविवार रात भोपाल में किया गया, जिससे बहुत ही भावुक और शोकपूर्ण माहौल बन गया। भदभदा विश्राम घाट स्थित मुक्तिधाम में परिवार और करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में ट्विशा को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान परिवार की आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे और हर चेहरा गहरे सदमे में डूबा नजर आया।
वीडियो और तस्वीरों में ट्विशा शर्मा की मां को फूट-फूटकर रोते हुए देखा गया, जबकि उनके पिता नव निधि शर्मा खुद को संभालने की कोशिश करते दिखाई दिए। भारी मन से उन्होंने कहा कि वह इस समय बेहद भावुक हैं और केवल अपनी बेटी को अंतिम विदाई देना चाहते हैं। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार: दूसरे पोस्टमॉर्टम के बाद हुआ अंतिम संस्कार
ट्विशा शर्मा के अंतिम संस्कार में हुई देरी का मुख्य कारण दूसरा पोस्टमॉर्टम था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। परिवार और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार जांच में पारदर्शिता की मांग की जा रही थी। कोर्ट ने इस मांग और बढ़ती पब्लिक चिंता को देखते हुए निष्पक्ष मेडिकल जांच की गारंटी देने के आदेश जारी किए।
दूसरे पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परिवार ने अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। परिवार के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने बताया कि शुरुआती योजना दिल्ली में अंतिम संस्कार करने की थी, लेकिन अत्यधिक गर्मी और मेडिकल प्रक्रियाओं को देखते हुए भोपाल में ही अंतिम संस्कार करना अधिक व्यावहारिक माना गया।
उन्होंने कहा कि इतनी लंबी दूरी तक शव को ले जाना कठिन था और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर अंतिम निर्णय भोपाल में ही अंतिम संस्कार करने का लिया गया।
मौत का मामला बना राष्ट्रीय बहस का मुद्दा
नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में हुई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और एक बार फिर भारत में दहेज प्रथा तथा महिलाओं के उत्पीड़न को लेकर गंभीर बहस शुरू हो गई।
इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अलग-अलग आरोप लगाए हैं। ट्विशा के परिवार ने उसके ससुराल वालों के इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि वह नशे की लत से जूझ रही थी; इसके विपरीत, परिवार का दावा है कि वह लगातार दहेज उत्पीड़न का शिकार हो रही थी। ट्विशा के परिवार का कहना है कि सामाजिक और भावनात्मक दबाव के कारण ही उसने आत्महत्या कर ली।
“सोशल मीडिया पर इस घटना ने तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा, जिसके बाद हज़ारों यूज़र्स ने न्याय की मांग करते हुए #JusticeForTwisha अभियान शुरू किया। सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार संगठनों ने भी स्थिति की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार: CBI जांच की सिफारिश से बढ़ी उम्मीदें
मध्य प्रदेश प्रशासन ने इस नाजुक मामले की CBI जांच का सुझाव दिया है। स्थिति की गंभीरता और बढ़ते जन दबाव को देखते हुए, सरकार की यह कार्रवाई उल्लेखनीय मानी जा रही है। परिवार का कहना है कि उन्हें स्थानीय जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा नहीं था और वे शुरू से केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की मांग कर रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CBI जांच शुरू होती है तो मामले के कई ऐसे पहलू सामने आ सकते हैं, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं। साथ ही यह जांच यह भी तय करेगी कि क्या वास्तव में ट्विशा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था या मामले के पीछे कोई अन्य कारण था।
समर्थ सिंह पर बढ़ता कानूनी दबाव
इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनके परिवार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि समर्थ सिंह और उनकी मां, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने सुनवाई टालने के लिए अपनी पावर का इस्तेमाल करने की कोशिश की।
मामले ने तब और बड़ा मोड़ लिया जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने समर्थ सिंह का अधिवक्ता लाइसेंस निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें अपने नाम के आगे “अधिवक्ता” शब्द का प्रयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यह कार्रवाई कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लगभग 10 दिनों तक फरार रहने के बाद समर्थ सिंह ने शुक्रवार को जबलपुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। फिलहाल, अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे हैं और जांच दल मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच करने में जुटे हुए हैं।
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार: समाज के लिए बड़ा सवाल
ट्विशा शर्मा की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं रह गई है, बल्कि यह भारतीय समाज के सामने एक बड़ा प्रश्न बनकर उभरी है। दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे आज भी देश में गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
हर साल हजारों महिलाएं दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं, लेकिन कई मामलों में न्याय मिलने में लंबा समय लग जाता है। ट्विशा मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सामाजिक प्रभाव, कानूनी दबाव और जनआक्रोश तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं।
https://vartaprabhat.com/pahalgam-terror-attack-nia-chargesheet-full-timeline-gopro-kill-zone/
अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती हैं और क्या ट्विशा शर्मा के परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
लेखक के बारे में:
अमित कौल
अमित कौल वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, संस्कृति और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वर्तमान में वह Vartaprabhat.com के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।
